Uncategorized

वर्ल्ड कप जितने के साथ ही कैंसर को भी मात देकर लौटे युवराज, फिर भी नहीं मिला फेयरवेल

भले युवराज ने क्रिकेट को अलविदा कह चुके हो लेकिन उनके बुलंद हौसले और बेहतरीन बैटिंग के साथ ही स्पिनर बॉलिंग का अंदाज़ दुश्मन के हौसले पस्त कर देता था। सिर्फ क्रिकेट में ही नहीं बल्कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़कर उसे धूल चटाकर नाबाद लौटे है युवराज सिंह। आज उनका बर्थडे है। और क्रिकेट में उनको उनके उम्दा प्रदर्शन के लिए हमेशा याद किया जाता रहा है भले युवराज़ ने क्रिकेट से हमेशा के लिए विदा ले ली हो लेकिन क्रिकेट उन्हें कभी विदा नहीं किया। जब भी बात उम्दा खिलाड़ियों की सचिन धौनी और सहवाग की आती है तो उस लिस्ट में इनका नाम भी हमेशा लिया जाता रहेगा।

2011 क्रिकेट वर्ल्‍ड कप (2011 Cricket World Cup) के नायक युवराज सिंह (Yuvraj Singh) का आज जन्‍मदिन है. 12 दिसंबर 1981 को पैदा हुए इस सुपरस्‍टार खिलाड़ी ने भारतीय फैंस को एक नहीं दो नहीं बल्कि चार वर्ल्ड कप जीत के तोहफे दिए। युवराज क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं लेकिन जब वे मैदान पर उतरते थे तो उन्हें खेलता देखने के लिए दर्शक सब काम छोड़ देते थे। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में डेब्‍यू के बाद युवराज (Yuvraj Singh)  भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर की जान बन गए। फिर 2007 वर्ल्‍ड टी20 हो या 2011 का वर्ल्‍ड कप, इस खिलाड़ी ने अपने खेल से विरोधी टीमों को नेस्‍तनाबूद कर दिया। मजेदार बात यह है कि युवराज ने अपने करियर में 4 वर्ल्‍ड कप जीते। अंडर 19, टी20 वर्ल्‍ड कप और वनडे वर्ल्‍ड कप के बारे में तो सबको पता है लेकिन युवराज अंडर 16 वर्ल्‍ड कप जीतने वाली टीम के भी सदस्‍य थे।

युवराज सिंह (Yuvraj Singh) का वर्ल्‍ड कप से किस कदर नाता है यह इस बात से समझा जा सकता है कि भारत ने उनकी मौजूदगी में जो भी वर्ल्‍ड कप जीता उसके नायक हमेशा युवराज सिंह रहे। युवराज सिंह ने सीनियर लेवल पर 7 आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल खेले और ऐसा करने वाले वह इकलौते खिलाड़ी हैं। वह 3 बार चैंपियंस ट्रॉफी और 2 बार 50 ओवर वर्ल्ड कप और 2 बार वर्ल्ड टी20 फाइनल का हिस्सा रहे हैं। युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने पहला वर्ल्ड कप अंडर 16 लेवल पर खेला था। इस टूर्नामेंट वह मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। इसके बाद साल 2000 में कोलंबो में खेले गए अंडर 19 वर्ल्ड कप में भी युवराज सिंह ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन कर भारत को जीत दिलाई थी। उन्‍होंने इस टूर्नामेंट में 200 से ज्यादा रन बनाने के साथ 12 विकेट हासिल किए थे और वह मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे।

युवराज सिंह ने साल 2007 में खेले गए पहले टी20 वर्ल्ड कप में भी भारत को चैंपियन बनाया था। युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ स्टुअर्ट ब्रॉड की 6 गेंदों में 6 छक्के लगाकर इतिहास रचा था, साथ ही उन्होंने महज 12 गेंदों में अर्धशतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था।सेमीफाइनल में उन्‍होंने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ 30 गेंदों में 5 छक्‍कों की बदौलत 70 रन की पारी खेलकर टीम को फाइनल में पहुंचाया था। इस टूर्नामेंट में युवराज सिंह बेस्ट बल्लेबाज चुने गए थे।

4 साल बाद जब भारतीय उपमहाद्वीप में 50 ओवर का वर्ल्‍ड कप खेला गया तब युवराज सिंह के हरफनमौला खेल की बदौलत ही भारत ने 28 साल बाद यह टूर्नामेंट जीता था।इस टूर्नामेंट में भी प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट अवॉर्ड युवी को ही मिला था।युवी ने टूर्नामेंट में 90 से ज्यादा की औसत से 362 रन बनाए थे।साथ ही उन्होंने 15 विकेट अपने नाम किए थे। जब वह यह टूर्नामेंट खेल रहे थे तब कैंसर से जूझ रहे थे। लेकिन उन्‍होंने किसी को इस बात की भनक नहीं लगने दी। वे उल्टियां करते रहे और भारतीय टीम के लिए गेंद व बल्‍ले से कमाल करते रहे।
करियर के ढलान पर युवराज सिंह को काफी शिकायतें रहीं। 2019 में जब उन्‍होंने संन्‍यास का ऐलान किया तब उन्‍होंने कहा था कि अच्‍छा प्रदर्शन करने और टीम इंडिया के चयन के बाकी मानकों पर खतरा उतरने के बावजूद उन्‍हें मौका नहीं मिला। युवराज सिंह ने साफ कहा कि चयनकर्ताओं की ओर से उन्‍हें कोई स्‍पष्‍ट बात नहीं कही गई। उन्‍हें रिटायरमेंट को लेकर कोई फेयरवेल मैच भी नहीं मिला और भारत को वर्ल्‍ड कप चैंपियन बनाने वाला शख्‍स बिना किसी सम्‍मानजनक विदाई के दूर चला गया।
Please follow and like us: