नर्मदा नदी किनारे दिखा सफ़ेद कौवा
अजब गजब

नर्मदा नदी किनारे दिखा सफ़ेद कौवा, अमृत पिने से हो गया था काला

दुनिया अजीबो गरीब किस्सों कहानियों से भरी पड़ी है। आये दिन कही कोई खबर सुनने को मिलती है। कुछ खबरें तो ऐसी होती हैं जिनपर भरोसा कर पाना ही नामुमकिन हो जाता है, लेकिन ये खबरें सच होती हैं।

अभी हाल ही में एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया, मध्य प्रदेश में सफेद कौवे को देख गया। हमने अपने बचपन से लेकर आज तक कभी सफेद कौवा नही देखा। वैसे इस सफेद कौवे को लेकर बड़ी सारी धारणाएं हैं।


वॉज्ञानिकों का मानना है कि लाखों में से किसी एक पक्षी के साथ ऐसा होता है, कौवों में लुज़िस्म की कमी या न होने की वजह से ऐसा होता है। पौराणिक धारणाओं के हिसाब से ऋषि मुनियों के श्राप की वजह से कौवों का रंग काला होता ही।


कहानी ये है कि एक ऋषि मुनि ने कौवे को किसी पहाड़ पर अमृत खोजने के लिए भेजा था, और कहा था के वो लौजने के बाद सिर्फ जानकारी लाकर दे पर उसका सेवन बिल्कुल भी न करे।

कौवा खोज में निकल गया लेकिन जब उसे अमृत मिला तो उसने पहले उसे पी लिया फिर ऋषि को उसकी जानकारी दी। ऋषि मुनि को जब इस बात का पता चला तो नाराज़ हुए और कहा कि तूने अपनी अपवित्र चोंच से अमृत को अपवित्र कर दिया है।

फिर ऋषि मुनि ने उसे अपने काले कमंडल में डुबो दिया जिससे कौवे का रंग काला हो गया। और उसे अमृत न पीने का वचन भंग करने पर यह श्राप दिया कि वह ज़िन्दगी भर घृणा और अपवित्र की नज़रों से देखा जाएगा।


यह तो था इसका पौराणिक पहलू। ज्योलॉजी के एक प्रोफेसर के मुताबिक एलबीनीजम प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण कुछ कौवा मूल रंग का जीव न होकर सफेद रंग का पैदा हो जाता है।


नर्मदा नदी के किनारे जिस गांव में यह कौवा देखा गया है वह यह पीछे तीन सिन से रह रहा है।


वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि लाखों कौवों में किसी एक का रंग सफेद होता ही होता है।

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