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कभी होटल में गाना गा कर करती थी गुज़र-बसर, फिर मिली बॉलीवुड में एंट्री, जानिये उषा उथुप का सफर

जाने ऊषा उत्थुप के होटल से बॉलीवुड का सफर 
डार्लिंग आंखों से आंखे चार करने दो रोको न रोको ना इस गाने की तरह फ़िल्म की गायिका ने भी कभी रुकने की कसम खाई और नाईट क्लब में गाते गाते यह सीधे बॉलीवुड पहुँच गई जी हां मैं बात कर रही हूँ कांजीवरम की साड़ी, बड़ी सी गोल बिंदी और बालों में फूल सजाने वाली पॉप सिंगर ऊषा उत्थुप के बारे में जिनका आज ही के दिन जन्म हुआ।
20 साल की उम्र में उत्थुप ने साड़ी पहन कर चेन्नई के माउंट रोड स्थित जेम्स नामक एक छोटे से नाइटक्लब में गाना शुरू किया। नाइटक्लब मालिक को ऊषा की आवाज अच्छी लगी और उन्होंने ऊषा को एक हफ्ते रुकने के लिए कहा। बस यहीं से उनकी जर्नी शुरू हो गई और पहली सफलता के बाद ऊषा उत्थुप ने  मुंबई के ‘टॉक ऑफ द टाउन’ और कलकत्ता के “ट्रिनकस”  नाइटक्लब में गाना शुरू किया। ट्रिनकस के बाद, ऊषा दिल्ली गई जहां पर उन्होंने ओबेरॉय होटल में गाना गाया। वहां इनकी मुलाकात शशि कपूर से हुई  और उन्होंने अपनी फिल्म में ऊषा को  गाने का मौका दे दिया। इसके बाद ऊषा ने 1970 में आई बॉम्बे टॉकीज में एक अंग्रेजी गण गया उसके बाद हरे राम हारे कृष्णा में दम मारो दम आशा के साथ इंग्लिश की लाईने गाई।
1968 में एक अंग्रेजी में ‘जाम्बालया’ और ‘द किंग्सटन ट्रायो’ नामक समूह का ‘ग्रीनबैक डॉलर’ नामक पॉप गानों की रिकॉडिंग की। जो दर्शकों को काफी पसंद आई। उत्थुप की आरके वर्मन और बप्पी लहरी के साथ अच्छी जुगलबंदी रही। इन्होंने सबसे ज्यादा गीत इन्हीं संगीतकारों के साथ गाए।
शालीमार’, ‘शान, वारदात’, ‘प्यारा दुश्मन’, ‘अरमान’, ‘दौड़’, ‘अरमान’, ‘डिस्को डांसर’, ‘भूत’, ‘जॉगर्स पार्क’ और ‘हैट्रिक’ जैसी फिल्मों में गाए गए उनके गीत सराहे गए। विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘सात खून माफ’ में रेखा भारद्वाज के साथ गाए गए गीत ‘डार्लिंग’ से उन्होंने खूब सुर्खिया बटोरीं।2012 में फिल्मफेयर अवॉर्ड बेस्ट सिंगर फीमेल भी जीता था। आज इनके लुक में थोड़ा सा बदलाव आ गया फूलो वाले जुड़े की जगह खुले बालों ने ले ली है। देखे तस्वीरें
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