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बेटी के जन्म लेने पर यह महिला डॉक्टर नहीं लेती हैं फीस, बल्कि पूरे नर्सिंग होम में बंटवाती हैं मिठाईयां…

मां की परछाई होती है बेटियां,तो पिता‌ की परी

दादी के आंगन की मासूम कली होती हैं बेटियां, तो दादाजी के होठों की मुस्कान।भाई की कलाई में रेशम की डोर से दुआओं को बांधती है बहन ,छोटी बहन की‌ दोस्त होती हैं बड़ी बहन।घर में खुशियों की सौगात होती है बेटी, सच में लक्ष्मी का रुप होती है बेटी। बेटी दो घरों में खुशियां बिखेरती है। जन्म लेती है तो लक्ष्मी रुप में मां बाप का घर आंगन महक उठता है उसकी खुशबू से और शादी होकर ससुराल पहुंचती है तो पति के घर की गृह लक्ष्मी बन कर उसका भाग्य सवांरती है।

साथ ही दो अनजान परिवारों को

अपने प्यार व विश्वास की डोर से एक मजबूत रिश्ते में बांधती हैं ।महिलाओं के अंदर प्यार करने की,विश्वास करने की ,नये रिश्ते अपनाने की,मातृत्व की, क्षमा,त्याग करने की क्षमता सहज रुप से हमेशा रहती है या यूं कहें कि उनको यह ईश्वरी वरदान होता है|इसीलिए बेटियां एक ओर जहां मां बाप के साथ हमेशा भावनात्मक रूप से जुड़ी रहती हैं ।वही दूसरी ओर नए परिवार को भी पूरी तरह से अपना लेती है। इतनी खूवियों के बावजूद भी बेटियों के जन्म में कई परिवार आज भी खुशियां नहीं मनाते।

हमारे समाज में बेटियों के साथ भेदभाव की खबर बहुत ही साधारण है। अक्सर महिलाओं को इस सामाजिक बुराई का सामना करना पड़ता है। सरकार इस भेदभाव को मिटाने के लिए जहां प्रयास करती रहती है वहीं समाज में कभी-कभी ऐसे उदाहण भी सामने आते रहते हैं जो इस मामले में नई उम्मीद जताते हैं। आज हम आपको ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने नर्सिंग होम में बेटी के जन्म लेने पर फीस नहीं लेती हैं। वाराणसी के पहाड़िया क्षेत्र में रहने वाली शिप्रा धर की इस मुहिम की तारीफ प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं।

बीएचयू से एमबीबीएस और एमडी कर चुकीं

शिप्रा धर की ये सकारात्मक शुरुआत कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीति को भी मिटाने का प्रयास है। आपको बता दें कि शिप्रा के नर्सिंग होम बेटी पैदा होने पर प्रसूता के परिवार से डिलीवरी चार्ज नहीं लिए जाते हैं। साथ ही पूरे नर्सिंग होम में शिप्रा की ओर से मिठाइयां बंटवायी जाती हैं। इतना ही नहीं, शिप्रा ने गरीब लड़कियों की शिक्षा का बीड़ा उठाया हुआ है। वो नर्सिंग होम में ही लड़कियों को पढ़ाती हैं। वो मददगार लड़कियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने में भी पूरी सहायता करती हैं। शिप्रा के इस काम में उनके फिजीशियन पति डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव पूरी मदद करते हैं।

शिप्रा बताती हैं कि हमेशा से ही कन्या भ्रूण हत्या

महिलाओं से भेदभाव जैसी कुरीतियां समाज में देखने को मिलती थीं, जिससे मन विचलित हो जाता था। मन में इसकी रोकथाम के लिए प्रयास करने का सपना था। इसी के चलते हमने अपने नर्सिंग होम से इस मुहिम को शुरू किया है। वे बताती हैं कि नर्सिंग होम में वह बेटी के जन्म पर फीस के साथ ही साथ बेड चार्ज भी नहीं लिया जाता है। ऑपरेशन भी पूरी तरह से मुफ्त किया जाता है। अभी तक उनके नर्सिंग होम में 100 से ज्यादा बेटियों की मुफ्त में डिलीवरी कराई जा चुकी हैं। यहां आने वाले परिवार शिप्रा की इस पहल की तारीफ करते नहीं थकते। वो जब भी नर्सिंग होम से अपनी बेटी को लेकर बाहर निकलते हैं तो उनके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान होती है।

पीएम नरेन्द्र मोदी भी शिप्रा के काम से

काफी प्रभावित हुए थे। वे जब मई में वाराणसी के दौरे पर आए थे तो उन्होंने मंच से डॉक्टरों को हर महीने की नौ तारीख को मुफ्त में डिलीवरी करने की अपील की थी। इसके सके साथ साथ उन्होंने गरीब लड़कियों की शिक्षा को भी फ़्री करने का बीड़ा उठाया है। अपने नर्सिंग होम में ही वे लड़कियों को पढ़ाती हैं। जिस घर की बेटियां आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनके लिए सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ दिलाने में मदद भी करती हैं। डॉक्टर शिप्रा धर बच्चों और कुपोषण से बचाने के लिए अनाज बैंक भी संचालित करती हैं।

इनका मानना है कि सनातन काल से ही बेटियों को लक्ष्मी का रूप माना जाता है।शिप्रा के इस काम की वाराणसी ही नहीं पूरे देश में तारीफ हो रही है। अपनी इस मुहिम के लिए वो एक नजीर बनकर उभरी हैं।

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