अजब गजब

कही आपका बच्चा बिगड़ तो नहीं रहा?

 

आजकल माहौल बहुत ज़ादा ख़राब हो गया है, इंसान-इंसान का नहीं रहा। जिसको जितनी ज़रूरत होती है उतनी देर लिए आपका होकर रहता है उसके बाद आप उसकी ज़िंदगी में थे भी ये भी उसे खुद नहीं मालूम होता। यही इंसानी फितरत है। ऐसी इंसान की बहुत सी गन्दी आदते हैं जो उसे आगे चल कर बहुत नुकसान करती हैं। और ये आदतें पीढ़ी दर पीढ़ी जाती रहती है। और फिर ऐसी ही आदतें माता पिता से बच्चों में भी आ जाती हैं। वैसे आजकल माँ बाप के पास अपने बच्चों के लिए वक़्त नहीं रहता, वे खुद अपनी ज़िंदगी में इतना व्यस्त हो गए हैं के बच्चे क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हैं। वैसे देखा जाए तो बच्चे पहले अपेक्षा आज के वक़्त ज़ादा बिगड़ रहे हैं। बच्चों के बिगड़ने के बहुत सारे कारण हैं।

लाइफस्टाइल इन कारणों में से एक बहुत बड़ा कारण है, अपने बच्चों के लिए माँ बाप के पास वक़्त नहीं होता, अपनी अपनी नौकरी में व्यस्त रहते हैं और अपने बच्चे को नौकरों के हवाले कर के चले जाते हैं, ऐसे में बच्चो को माँ बाप का प्यार नहीं मिल पाता और बच्चे के दिल में उनके प्रति प्रेम नहीं पनप पाता।

घर का ख़राब माहौल भी एक बहुत बड़ा कारण है जब बच्चे अपने घर में सबको एक दुसरे से लड़के देखते हैं, वे देखते हैं क घर में कोई एक दुसरे की इज़्ज़त नहीं करता, ऐसी में उनका दिमाग भी इस दिशा में चलने लगता है जिसकी वजह से बच्चे घर से कटने लगते हैं और बाहर गलत सांगत में आकर बिगड़ जाते हैं।

कई बार ऐसा भी देखा गया है जब बच्चों के बारे में माँ बाप को पता होता है लेकिन एडवांस सोच के चलते माँ बाप बच्चों के निजी जीवन में क्या चल रहा है उसके बारे में नहीं पूछते। बच्चे का फ्रेंड सर्किल कैसा है, उसकी किस तरह के बच्चों से दोस्ती है या बच्चे की किसी से लड़ाई हुई है, ऐसे में बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है।

देखिये बच्चा गीली चिकनी मिटटी की तरह होता है उसे बचपन से सही आकर देना ज़रूरी है ताकि बच्चा खुद के लिए, परिवार के लिए और सोसाइटी के लिए नुकसानदायक न साबित हो।

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