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धोनी जन्मदिन स्पेशल: कभी ट्रेन की टॉयलेट के पास सो जाया करते थे, आज दुनिया मुट्ठी में है

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक से एक धुरंधर देखने को मिले हैं, लेकिन कुछ धुरंधर ऐसे होते हैं जिनका कोई सानी नहीं होता या यूँ कह लें के उनके जैसा दोबारा पैदा हो ही नहीं सकता।

किसने सोचा था मिडिल क्लास फैमिली का लड़का एक दिन पूरी दुनिया में अपना नाम रौशन कर के दिखा देगा। हम बात कर रहे हैं देश के दिल की धड़कन महेंद्र सिंह धोनी की, जिन्होंने थोड़े बहुत पैसा कमाने के लिए टिकट कलेक्टर की भी नौकरी की थी।


धोनी माध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं, इनके पिता पंप ऑपरेटर थे, लेकिन धोनी ने कड़ी मेहनत से अपने सपनो को सच कर दिखाया।

धोनी ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है, एक वक्त की बात है जब महेंद्र सिंह धोनी जूनियर क्रिकेट खेलते थे और उनके पास पैसे नही होते थे। ऐसी हालत में जब भी उन्हें एक शहर से दूसरे शहर जाना होता था तो वो बिना टिकट के ही ट्रेन में चढ़ जाते थे। ऐसे में कई दफा उन्हें टॉयलेट के पास वाली जगहों पर सोना पड़ता था।

जानेमाने पत्रकार राजीव सरदेसाई ने अपनी किताब “टीम लोकतंत्र” में लिखा धोनी 2016-17 में रणजी सीजन खेलने के लिए यात्रा कर रहे थे और उनके पास पैसे नही होते थे, आज फर्स्ट क्लास में सफर करते हैं, फैन्स से बचने के लिए सिक्योरिटी भी रहती है। लेकिन जब धोनी बिना रिजर्वेशन वाले डिब्बे में सफर करते थे तो टॉयलेट के पास सो जाते थे। उन्होंने टिकट कलेक्टर का भी काम किया। स्ट्रगल के दिनों में उन्हें स्पोर्ट्स कोटा से दक्षिण-पूर्व रेलवे में नौकरी भीकरी, वे खड़गपुर स्टेशन में टिकट चेक करते थे, जहां उनका वेतन 3000 रुपये हुआ करता था।

धोनी के नाम रिकार्ड्स की बात करें तो आप गिनते गिनते थक जाएंगे। 2007 में T20 विश्व कप जीतने वाले पहले कप्तान बने और आज भी क्रिकेट में उनके जैसा कप्तान नही बन पाया।

धोनी की कहानी किसी मोटिवेशनल स्टोरी से कम नही है।

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