लाइफस्टाइल

शाम 6 बजकर 42 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 11 मिनट तक दिवाली पूजा का शुर्भ मुहूर्त

घर धन और धान्य से सपन्न रहें इसलिए करते दिवाली की पूजा

साफ सुथरे घरो में होता है मां लक्ष्मी का वास
इस बार प्रकाश का उत्सव यानी दिवाली का त्योहार 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस त्योहार को मनाने के पीछे मान्यता है कि इस दिन भगवान राम 14 साल वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। अयोध्या वासियों ने इस दिन देशी घी के दिये जलाकर भगवान राम का स्वागत किया उस दिन हर साल यह त्योहार मनाया जाता है।

लक्ष्मी की पूजा के पीछे मान्यता
धार्मिक कथा के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का आगमन हुआ था। इसलिए इस दिन को मां लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी पूजा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इसदिन मां लक्ष्मी सबके घरो में आती है। यही वजह है कि दिवाली के पहले लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं। क्योंकि गंदे घरों में लक्ष्मी का प्रवेश नहीं करती और बाहर से ही लौट जाती है। माना जाता है कि जिस घर में लक्ष्मी जी आती है वह घर धन और धान्य से सपन्न हो जाता है।

शुभ मुहूर्त:
इस बार दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा और गणेश पूजा का मुहूर्त शाम का है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजाकर 42 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 11 मिनट तक चलेगा।  दिवाली के दिन प्रदोष काल में पूजा करनी शुभ मानी जाती है. प्रदोष काल शाम 5 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 11 मिनट तक चलेगा।

क्या होता है प्रदोष काल

प्रदोष काल दिन-रात के मिलने को ही कहते है, जहां दिन विष्णु स्वरुप है वही रात माता लक्ष्मी स्वरुप है, दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है।  प्रदोष काल में दीप जलाकर दीपावली की पूजा करना शुभ माना जाता है।
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