हेल्थ और फिटनेस

लिखने आदत महिलाओं में दूर करेगी शारीरिक असंतुष्टी

दुख को लिखने से महिलाओं में आएंगी पॉजीविटी, जानें कैसे

कई बार हम अपनी बात किसी से नहीं कह पाते। हमें तकलीफ होती है हम उस तकलीफ को अल्फाज देकर उसे किसी से कह नहीं पाते। नतीजा हम अंदर ही अंदर घुटते रहते है। किसी से अपने दुख और तकलीफ को न कहने की आदम महिलाओं ज्यादा होती है। ऐसे में वह अपने अंदर तमाम सैलाब समेट लेती है और अंदर ही अंदर मरती रहती है। ऐसे में अगर आपकी भी ऐसी ही आदत और आप भी चाहकर भी अपने दुख और तकलीफ को किसी के सामने नहीं रख पाते है तो आप अपने दुख को लिखकर अपने अंदर चल रहे तुफान को रोक सकती है। एक हालिया अध्ययन में यह दावा किया गया है कि अपनी शारीरिक प्रभाव को लेकर असंतुष्ट महिलाएं अगर अपने दुख को कहीं लिखें, तो उन्हें इससे बेहद सकारात्मक नतीजे हासिल हो सकते हैं।

‘साइकोलॉजी ऑफ वुमन क्वार्टरली’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अपने दुख और क्षमताओं को पत्र में लिखने से शारीरिक छवि में सुधार आ सकता है। ‘नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय’ में प्रोफेसर और अध्ययन की सह लेखिका रेनी एंगेन ने कहा कि सकारात्मक शरीर छवि हस्तक्षेप’ महिलाओं को यह बताने पर केंद्रित हैं कि वे स्वभाविक रूप से सुंदर हैं या उन्हें उनके शरीर को प्यार करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले अक्सर असफल हो जाते हैं।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार महिलाओं में अपने शरीर के प्रति असंतुष्टि होती है। इससे भोजन संबंधी अनियमितताएं, विकार और अवसाद जैसी चिंताजनक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन में 1,000 से ज्यादा कॉलेज छात्राओं ने भाग लिया, जिसने एक बार फिर साबित किया कि अपनी चिंताओं और शारीरिक क्रियाओं से संबंधित पत्रों से शारीरिक छवि में सुधार हो सकता है।

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