हेल्थ और फिटनेस

तुलसी पत्ते का ऐसे करें इस्तेमाल, डाइबिटीज दूर भागेगा

डायबिटीज के कारण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कुदरती आयुर्वेद हेल्थ सेंटर के संस्थापक मोहम्मद यूसुफ एन शेख ने बताया इसका सही उपचार क्या है।

आजकल की व्यस्त ज़िन्दगी में आमतौर पर देखा जाता है कि ज्यादातर लोग डायबिटीज के शिकार हैं। डायबिटीज को मधुमेह भी कहते हैं। हमारे ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ जाने को डायबिटीज कहते है। आजकल हर उम्र के लोगों में यह बीमारी देखी जा रही है। समय रहते ही इस रोग को काबू करना बहुत जरुरी होता है क्योंकि अगर यह बढ़ गयी  तो जानलेवा हो सकती है। हमारी रोज की दिनचर्या में चीनी, मैदा, ओजहीन खाद्य उत्पादों का ज्यादा उपयोग इस रोग को दावत देता है। इस रोग के लिए लोग तमाम दवाओं का इस्तेमाल करते है लेकिन क्या आपको पता है। तुलसी के पत्ते भी डायबिटीज कंट्रोल करने में मददगार होते हैं।

तुलसी के पत्तों में ब्लड शुगर के स्तर को कम करने की शक्ति होती है। इनमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि ब्लड शुगर को कंट्रोल कर एक्स्ट्रा शुगर कंटेंट को शरीर से निकालने में मदद करते हैं।

आजकल डायबिटीज की समस्या बढ़ रही है और युवा पीढ़ी पर इसका ज्यादा असर हो रहा है। बहुत सी आदतें जैसे गलत खान-पान और अनियंत्रित जंक फूड के सेवन ही डायबिटीज पीड़ितो की संख्या में वृद्धि कर है।डायबिटीज के कारण बहुत से और रोग जैसे हार्ट प्रॉब्लम, अंधापन, किडनी प्रॉब्लम, रक्त वाहिनियों को नुकसान, संक्रमण, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, आदि बीमारियों का जन्म होता है। वैसे तो बाजार में डायबिटीज का इलाज इन्सुलिन और मेडिसिन्स द्वारा उपलब्ध है, मगर इसमें आयुर्वेद इलाज भी कारगर है जो घर बैठे किया जा सकता है।

डायबिटीज के इलाज़ में आयुर्वेद सबसे उत्तम है क्योंकि इसके अंतर्गत डाइट, पंचकर्म और व्यायाम के माध्यम से इलाज किया जाता है। यहां इसके लिए प्रबंधन तकनीक जैसे व्यायाम, आहार विनियमन, पंचकर्म (जैव-शुद्धीकरण प्रक्रियाएं) और दवाइयां हैं। हम हमेशा से पढ़ते और सुनते आ रहे हैं की व्यायाम के बिना कोई भी दवा असरदार नहीं है क्योंकि व्यायाम करने से डायबिटीज बहुत हद तक कंट्रोल की जा सकती है और यह उन लोगो को जरूर मदद करता है जो शुगर से इसलिए ग्रस्त हैं क्योंकि उनका वजन ज्यादा है।

व्यायाम के साथ साथ ध्यान भी हमारे शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है। ध्यान करने से कोर्टिसोल , एड्रेनालाईन और नार एड्रेनालाईन के रूप में तनाव हार्मोन इंसुलिन और ग्लूकोज के स्तर के उत्पादन को तेज करके शुगर लेवल को संतुलित करते हैं।
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