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अजीब परंपरा : आखिर क्यों करा देते हैं लड़कियों की कुत्तों से शादी

बचपन मे गुड्डे गुड़ियों की शादी करना किसे पसंद नहीं होता यह शादी इतने आकर्षक होती है कि बच्चो के साथ साथ बड़े बूढ़े और माता पिता भी इनकी खुशी में शामिल हो जाते है। लेकिन मुंडा समाज के आदिवासी एक अजीब ही परंपरा पर भरोसा करते है यहां बात गुड्डे गुड़ियों की नहीं बल्कि दुधमुँहे बच्चों की हो रही है। जी हां मुंडा समाज के आदिवासी अपने बच्चो की शादी कुत्ते के पिल्लों से कराते है।

इस बात और परंपरा को सुनकर ही आपको भले ही हैरानी हो लेकिन यह सच है।  मुंडा समाज के आदिवासी अपने बच्चो के ग्रह-दोष दूर भगाने के लिए उनका विवाह कुत्ते के बच्चे के साथ कर देते है। इस समाज के मुताबिक अगर कोई दुधमुंहे बच्चा पहले ऊपरी दांत मतलब ऊपर के दांत निकलता है तो उसे ग्रहदोष लग जाता है। यही वजह है कि एल लोग इस दोष को दूर करने के लिए पांच वर्ष से पहले ऐसे बच्चों की शादी कुत्ते से करा देते है। इतना ही नही ये शादी भी पूरे रीति-रिवाज व धूमधाम से होती है। बच्चों को दूल्हा-दुल्हन के रूप में सजाने के साथ कुत्ते के बच्चे को भी सजाया जाता है उसे माला भी पहनाया जाता है।

बड़े ही धूमधाम से बारात निकालकर यह शादी सम्पन्न की जाती है इसमे बड़े-बुजुर्ग पूजा-अर्चना के साथ बच्चों और कुत्ते को हल्दी लगाते हैं। मांग भरी जाती है और आशीर्वाद लिया जाता है। शादी संपन्न होते ही समाज की महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए झूमते-नाचते दूल्हा-दुल्हन को घर ले जाती हैं, जहां उनके पैर धुलाकर घर प्रवेश कराया जाता है। इस खुशी में रातभर जश्न मनाया जाता है। बड़े होने तक दूल्हा-दुल्हन की देखरेख की जिम्मेदारी समाज के लोगों की होती हैं यह परंपरा इस समाज मे सदियों से चली आ रही है।  बच्चों के परिजन रस्म अदा करते हुए कुत्ते का स्वागत करते हैं। उन्हें उपहार में रुपये भेंट किए जाते हैं। उनके भी हाथ-पैर व माथे में हल्दी का लेप किया जाता है और सबसे आखिर मे दूल्हा कुत्ते का हाथ पकड़कर दुल्हन बच्ची के माथे में सिंदूर लगाया जाता है। वहीं दूल्हा बने बच्चे द्वारा दुल्हन कुत्ते के माथे में सिंदूर लगाकर शादी की रस्म पूरी कराई जाती है। दिनभर गाने व नाचने का दौर चलता है। वहीं बस्ती में विशेष व्यंजन बनाकर एक-दूसरे को बांटे जाते हैं।

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