फैशन

पर्दे की ड्रेस पहनकर बनी मिस यूनिवर्स तो वहीं मोजे के बने दस्ताने पहन जीत लिया सबका दिल

मंजिल दौलत की मोहताज नहीं होती इसका जीता जागता सुबुत है सुष्मिता सेन

हमसे कितने लोग है जो अपने हलातो से समझौता कर लेते है। कई बार हम जहां पहुंचना चाहते है वहां नहीं पहुंच पाते क्योंकि उसके लिए पैसों की जरुरत होती है और हम अपनी हार मान लेते है। लेकिन कहते अगर आप ने एक बार मन में कुछ करने की ठान ली फिर आपकी मंजिल किसी दौलत की मोहताज नहीं होती। आप वह हासिल कर लेते हो जो आप चाहते हो इसका जीता जागता उदाहराण है ब्रामाण्ड सुंदरी सुष्मिता सेन। आज का दिन उनके लिए दोहरी खुशियां लेकर आता है। आज के दिन उनका जन्म हुआ और आज ही के दिन वह मिस यूनिवर्स बनी।

जी हां पूर्व मिस यूनिवर्स और बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन का जन्म 19 नवंबर 1975 को हैदराबाद में हुआ था। 43 साल की उम्र में भी लाखों लोग उनकी एक मुस्कुराहट के  दीवाने हैं। सुष्मिता ही वह पहली महिला है जिसने 1994 में मिस यूनीवर्स का खिताब भारत के नाम किया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि जब उनको मिस यूनिवर्स का खिताब दिया गया था। तब उनके पास महंगे कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं थे। सुष्मिता ने भारत की झोली में यह अर्वाड डालकर देश का नाम रौशन किया उस समय उनके पास प्रतियोगिता के लिए अच्छा गाउन खरीदने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन इसके बाद भी सुष्मिता ने हार नहीं मानी और आज फैशन इंडस्ट्री का जाना माना नाम हैं।

जी हां एक तरफ जब प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए लड़कियों के पास महंगे डिजाइनर गाउन थे, वहीं सुष्मिता सेन के पास इतने पैसे नही थे कि प्रतियोगिता के चार राउंड के लिए मंहगी ड्रेस खरीदें। सुष अपनी मां के साथ दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट गई जहां उन्होंने परदे का कपड़ा और एक जोड़ी जुराब खरीदी। सुष के घर के नीचे गैराज में एक दर्जी बैठता था। उनकी मां ने उसी को वो पर्दे का कपड़ा थमाते हुए बोला ”देखो, टीवी पर आना है, अच्छी सी ड्रेस सिल दो।” आपको जानकर हैरानी होगी की रैंप पर उन्होंने जो अपने हाथों में गल्वस पहने थे, वो उनकी मां ने मोजे से तैयार किए थे।

बस फिर क्या था सुष ने वही ड्रेस और दस्ताने पहन कर सिर्फ मिड इंडिया के रैंप पर वॉक किया। पहले रनर अप के लिए जब ऐश का नाम पुकारा गया तो उनकी आंखों में यह सोचकर आंसू आ गए थे कि उन्हें लगा कि वह पहली रनर अप भी नहीं बन पाईं, क्योंकि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह ऐश को हरा देंगी, लेकिन इसके बाद जब मिस इंडिया 1994 के लिए उनके नाम की घोषणा हुई, तो उनके तो जैसे होश ही उड़ गए। इस प्रतियोगिता में ऐश और सुष के बीच टाय हुआ था। 29 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किन्ही दो प्रतियोगियों के प्वाइंट भी बराबर हो। दोनों के प्वाइंट बराबर होने पर ऐश और सुष से फिर से सवाल पूछे गए और आखिर में ऐश के नंबर 9.39 जबकि सुष के 9.41 थे। इसके बाद सुष्मिता ने मिस कोलंबिया को हरा कर ब्रह्मांड सुंदरी का खिताब अपने नाम किया। यह पहली बार था जब किसी भारतीय सुंदरी ने यह खिताब जीता हो।

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