अजब गजब

पाकिस्तान का तनोट माता मंदिर जहां बम के गोलों ने भी घुटने टेक दिए, नहीं फटा एक भी बम

पाकिस्तान ने गिराए हज़ारो बम, सारे सारे हो गए बेकार 
हमारे भारत में ऐसी आश्चर्यजनक जगह है, जहां लोग मानते है की यहां भगवान साक्षात निवास करते है। इतना ही नही समय पर भगवान वहां अपने होने का सबूत देकर लोगों को चौकाते रहते है। आज हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे मे बताने जा रहे है। जहां 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के हज़ारो बम बेअसर हो गए थे और एक भी बम नही फटा था।
इस मंदिर का नाम  तनोट माता मंदिर है। यह जैसलमेर से करीब 130 किलो मीटर दूरी पर भारत और पाकिस्तान बॉर्डर के पास बना हुआ है। यह 12 सौ साल पुराना मंदिर अपने भक्तों के लिए हमेशा आस्था का केंद्र रहा है लेकिन इसकी प्रसिद्धि चारों दिशा तब अधिक हुई थी जब भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग लड़ी गई थी। उस दौरान पाकिस्तान की ओर से बरसाए सभी बम जो इस मंदिर के आस पास गिरे थे, उनमें से एक भी बम नही फटा और इस मंदिर को जरा सी खरोंच तक नहीं आई।
तब से इस मंदिर से कई मान्यताएँ जुड़ गई।  इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की पाकिस्तान को दो बार उसी जगह मात देने में तनोट माता का ही आशीर्वाद है। 1965 की जंग के बाद नें यहाँ एक चौकी स्थापित गयी थी। तब से यहां भारतीय सेना माथा टेकने आने लगी। जंग के दौरान वहाँ परिसर में जो बम फटे नहीं थे उन्हे संग्रहालय में आज भी सुरक्षित रखा गया है।
4 दिसंबर की रात को मंदिर के करीब ही लोंगेवाला में पंजाब रेजिमेंट और सीमा सुरक्षा बल की एक टुकड़ी ने पाकिस्तान की एक पूरी टैंक रेजिमेंट को धूल चटा दी थी और लोंगेवाला को पाकिस्तानी टैंको का कब्रिस्तान बना दिया था। लोंगेवाला की जीत के बाद मंदिर के में एक विजय स्तंभ बनवाया गया था। 16 दिसंबर को सहीदों की याद में इस मंदिर में उत्सव मनाया जाता है। तनोट माता को आवड माता के नाम से भी जाना जाता है।
तनोट माता को हिंगलाज माता का ही एक रूप माना जाता है, हिंगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। प्रति वर्ष आश्विन और चै‍त्र नवरात्र में यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। तनोट माता को आवड माता के नाम से भी जाना जाता है।
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