अजब गजब धार्मिक

इस मंदिर में आने वाले भक्त बन जाते हैं पत्थर के, जानिए हैरान कर देने वाली सच्चाई

इस मंदिर में होते है ऐसे चमत्कार जो आपके उड़ा देगे होश

भारत में मौजूद हर मंदिर कुछ खास चमत्कारो की वजह से प्रसिद्ध है इसी वजह से इन मंदिरो में भक्तो का ताता लगा रहता है। लेकिन इन मंदिरो में एक मंदिर ऐसा भी है जो एकदम सुनसान रहता है। इस मंदिर के सुनसान रहने वजह भी चमत्कार और भक्तों की मान्यता ही है जिस वजह से लोग यहां आने से डरते है। हम जिस मंदिर की बात कर रहे है वह है राजस्थान की रेतीली भूमि पर बना किराडू मंदिर जहां पर बहुत से रहस्य दफन है और इन्ही रहस्यों की वजह से यह मंदिर हमेशा सूनसान रहता है।

दरअसल  इस मंदिर की बहुत सी ऐसी मान्यताएं हैं जिसको सुनने के बाद आप उन पर विश्वास करने के लिए मजबूर हो जाएगें। राजस्थान का यह मंदिर रहस्यमई होने के साथ-साथ बहुत खूबसूरत भी है। राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित इस किराडू के मंदिर को खजुराहो मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।  इस मंदिर के विषय में बहुत सी कथा भी प्रचलित है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि यहां आने वाले लोग पत्थर के बन जाते है। इसी डर की वजह से पूरा क्षेत्र वीरान रहता है।

कहा जाता है कि शाम होने के पश्चात यहां पर जो भी रुकता है वह पत्थर का बन जाता है और उसकी जान चली जाती है इस वजह से यह मंदिर हमेशा सुनसान रहता है। इसके वीरान होने के पीछे एक कहानी है। यहां के लोगों का यह मानना है कि बहुत पुराने समय पहले एक महान ऋषि अपने शिष्यों के साथ इस जगह पर आए थे जब वह घूमने निकले तो उनके सभी शिष्यों की तबीयत खराब हो गई थी इस दौरान उनकी किसी ने भी मदद नहीं की थी बस एक कुम्हारन ने ही उनकी सहायता की थी जब ऋषि वापस लौटें और उनको इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने पूरे गांव को श्राप दे दिया था कि जिस जगह इंसानियत नहीं है उन्हें पत्थर का बन जाना ही सही होगा।


जब पूरे गांव को ऋषि द्वारा श्राप दे दिया गया था कि शाम होने तक इस गांव के सभी व्यक्ति पत्थर के बन जाएंगे तो इसके साथ ही ऋषि ने उस कुम्हारन को उस गांव से जाने के लिए भी कहा और यह हिदायत दी कि वह वापस मुड़कर ना देखें फिर क्या था वहां के सभी लोग धीरे-धीरे करके पत्थर के बनते चले गए और जब कुम्हारन गांव से जा रही थी तो उसने पीछे मुड़कर देख लिया और वह भी उसी जगह पर पत्थर की बन गई थी ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था और उसके पश्चात इस श्राप के कारण यह स्थान सुनसान रहता है।

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