अजब गजब

जिसको गूगल पहचान नहीं दिला पाया उसकी समोसे नहीं बदली किस्मत, क्या आप भी खाते है समोसे

हमारे भारत में बेरोजगारी की बात की जाएं तो हर तीसरा युवा बेरोजगार है। ऐसे में युवाओं को जो जहां मिल जाता है वह वहीं चिपक जाता है।  बात अगर प्राईवेट नौकरी की हो तो अगर एक बार युवाओं को किसी बड़े ब्रांड में नौकरी मिल जाए तो वह छोड़ना नहीं चाहता है।  खासकर बात अगर उन युवाओं की करे जो आई फिल्ड में काम करने का सपना देख रहे तो उनके लिए गूगल जैसी कंपनी में काम करना किसी सपने से कम नहीं है। अगर एक बार इस कंपनी में आप घुस गए तो सारी जिन्दगी ऐश आराम के साथ गुजर जाएगी। यह कंपनी अपने एम्पलॉए को लाखो नहीं करोड़ो का पैकेज देती है। ऐसे में इस कंपनी के साथ जुड़ना कौन नहीं चाहेगा। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक शख्स ने समोसे बेचने के शौक का पूरा करने के लिए गूगल की अच्छी खासी नौकरी को लात मार दी और आज उस समोसे की दुकान से वह करोड़ो का टर्न ओवर कमा रहा है।

इस शख्स का नाम मुनाफ कपाडि़या है। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद कई कंपनियों में नौकरी करने वाले मुनाफ कपाड़िया को आज से कुछ सालों पहले गूगल में नौकरी मिल गई। कई सालों तक नौकरी करने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि वह यहां से बेहतर काम अपने घर पर रहकर कर सकते हैं।

फिर क्या था उन्होने अच्छी खासी नौकरी को लात मार दी।  नौकरी छोड़ने के बाद मुनाफ ने द बोहरी किचन नाम का एक रेस्टोरेंट खोला। उस रेस्टोरेंट में मुनाफ की मां ने अपने हाथों से खाना बनाकर कई लोगों को खिलाया। मां के हाथो का जादू चल गया और खाना खाने वालो ने मां के बनाए खाने की काफी तारीफ की। लोगों की तारीफ को सुनने के बाद मुनाफ को और प्रोत्साहन मिला।

प्रोत्साहन मिलने के बाद वह अपने सपने को पूरा करने में लग गए। अपने सपने को पूरा करने में उन्हें काफी  कम वक़्त लगा। काफी कम वक़्त में ही उनका रेस्टोरेंट द बोहरी किचन सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष के लोगों के बीच पॉपुलर हो गया। आज उनके रेस्टोरेंट के खुले 1 साल भी नहीं गुजरे हैं और उनकी रेस्टोरेंट का टर्नओवर लगभग 50 लाख तक पहुंच चुका है। मुनाफ की माने तो आने वाले वक्त में उन्हें इस कंपनी का टर्नओवर को तीन से 5 करोड़ तक लेकर जाना है।

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