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भारत देश में पैदा हो रहे बच्चों की उम्र हुई ढाई साल कम, वजह है चौंका देने वाली

बेंगलुरु: देश भर में साइंस ने काफी विकास और उन्नति हासिल का ली है. आज मनुष्य के पास हर प्रकार की मशीने हैं जो उनके काम को और भी आसान बना रही है. वहीँ वाहनों ने मनुष्य के जीवन को बेहतरीन बना दिया है. अब मनुष्य कहीं भी वाहनों की मदद से आ जा सकता है. लेकिन इस तरक्की की राह में हम एक बात पर ध्यान देना भूल रहे हैं और वह है प्रदुषण. हाल ही में वायु प्रदुषण की एक ग्लोबल रिपोर्ट में हुए खुलासे से पता चला है कि गुरुग्राम सबसे अधिक प्रदूषित शहर है जबकि दिल्ली इस मामले में दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी मानी गई है. दिलवालों की दिल्ली को प्रदुषण में सबसे अव्वल दर्जा मिलना देश भर के लिए शर्म की बात है इस रिपोर्ट के बाद कईं भारतियों की आँखें शर्म से झुक गई हैं. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि अब देश में यदि कोई बच्चा पैदा होता है तो उसकी उम्र औसत उम्र से ढाई वर्ष कम हो गई है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो दुनिया में मौत दर जन्म दर इ दुगुनी हो जाएगी.

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के बाद दक्षिण एशिया इस प्रदुषण में सबसे आगे है. ऐसा हम नही कह रहे बल्कि यह पर्यावरण पर बनी वैश्विक रिपोर्ट का कहना है. “स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर 2019” के अनुसार भारत में प्रदुषण इतना अधिक बढ़ चुका है कि अब यहाँ पैदा होने वाले बच्चों की उम्र औसतन ढाई वर्ष कम हो चुकी है. हालाँकि इस रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी सरकार की उज्ज्वल योजना की तारीफ़ की गई है.

इस रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में वायु प्रदुषण इस समय अपने उच्च स्तर पर पहुँच चुका है जिसकी वृद्धि से वहां रहने वाले लोगों की अपेक्षित उम्र में औसतन 20 महीनों की कमी आ रही है. रिपोर्ट के अनुसार जिस समय पूरी दुनिया प्रदुषण जैसी घातक समस्या से जूझ रही है वही भारत इस प्रदुषण पर लगाम लगाने की दिन रात कोशिशें कर रहा है. इस मामले में सरकार और पर्यावरण संस्थाएं आए दिन ठोस कदम उठा रही है ताकि इस समस्या से जल्द से जल्द छुटकारा पाया जा सके. इसके लिए सरकार की उज्ज्वला योजना और वाहनों के लिए भारत स्टेज 6 के मानक लागू करने जैसी योजनाएं काफी अहम भूमिका निभा रही है.

वायु प्रदुषण की रिपोर्ट के अनुसार देश में लोगों की मौत के कई कारण हैं लेकिन इनमे से प्रदुषण तीसरी ऐसी वजह है, जो हर साल कईं लोगों की जान ले रहा है. प्रदुषण से होने वाली मृत्यु दर संख्या धुम्रपान से होने वाली मौतों से भी अधिक है. बता दें कि दुनिया में बेशक अर साल सैंकड़ों लोग सडक हादसे या किसी बीमारी से जूझते हुए मर रहे हैं लेकिन वायु प्रदुषण की बीमारियाँ और इनसे होने वाली मौतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

इस रिसर्च के अनुसार यह पाया गया है कि वर्ष 2017 में बाहरी तथा घर के भीतर के वायु प्रदूषण से लम्बे वक्त तक सम्पर्क में रहने के कारण बहुत से लोग पक्षाघात, मधुमेह, दिल के दौरे, फेफड़े के कैंसर आदि जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित हो कर मौत के करीब पहुँच चके हैं. यह आंकड़ा 50 लाख के करीब पहुँच चुका है. जिसमे 30 लाख लोगों के मरने की सीधी वजह पीएम 2.5 है. ऐसे में यदि समय रहते इस प्रदुषण को कम नही किया गया तो यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है.

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