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भारतीय नागरिकता कानून संशोधन जल रहा भारत

अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता का रास्ता साफ करने के लिए नागरिकता बिल में हो रहे संशोधन के खिलाफ हो रहें प्रदर्शन ने हिंसक रुप ले लिया है। नागरिकता संशोधन कानून बनने के खिलाफ बग्लादेश से लेकर दिल्ली तक विरोध-प्रदर्शन हो रहे है। यह प्रदर्शन   रुकने का नाम नहीं ले रहा है।  देश के उत्तर पूर्व से लेकर दक्षिण तक लोग इस कानून के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्र सरकार से इस कानून को बदलने की मांग कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र भी इस कानून के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।


नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दक्षिण दिल्ली में रविवार शाम प्रदर्शन ने हिंसा का रूप और जबरदस्त हिंसा हुई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई के दौरान जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के 50 छात्रों को हिरासत मे ले लिया। छात्रों को हिरासत में लेने और जामिया कैंपस में कार्रवाई के बाद छात्र पुलिस मुख्यालय पर धरने पर बैठ गए।

क्यों  हो रहा इस संशोधन पर विवाद

दरअसल विधेयक में गैरकानूनी प्रवासियों के लिए नागरिकता पाने का आधार उनके धर्म को बनाया गया है। यहीं वजह विवाद का मुद्दा बन गया है। जिसके प्रदर्शन में लोग सड़को पर उतर आएं है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की बात कही गई है।

कौन से राज्य

गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 और 6 के तहत प्रवासियों को नागरिकता और प्राकृतिक प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिये कलेक्टरों को शक्तियां दी हैं। पिछले ही वर्ष गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियम, 2009 की अनुसूची 1 में बदलाव भी किया था।

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