अजब गजब

याद्दाश्त लौटने पर भिखारी बना करोड़पति, घर का पता भी भूल गया था

इस दुनिया हर इंसान कुछ न कुछ करके अपना गुजर बसर करते है। कोई नौकरी करता है तो कोई बिजनेस कुछ लोग कुछ भी नहीं करते क्योंकि उनके पास कुछ करने के लिए होता ही नही तो वो सड़को पर भीख मांगकर अपना गुजारा करते है। हम सबको लगता है  भीख मांगने वाले बेचारे बेहद लाचार और गरीब होते होंगे लेकिन यह जरूरी नही है। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे है जो गरीब या बेचारा नहीं है बल्कि करोड़पति है। यह सुनकर भले ही आपको हैरानी हो लेकिन यह सच है।

मंदिर के किनारे हरियाणा के अंबाला कैंट में पुरानी अनाज मंडी में कुछ महीनों से एक आदमी भीख मांग कर अपना गुजारा कर रहा था। कभी कोई उसपर तरस खाकर रोटी दे जाता तो वहीं कोई चंद सिक्के झोली में डाल जाता है। लेकिन ये कोई भिखारी नहीं बल्कि करोड़पति है। आज़मगढ़ के रहने वाले इसका नाम धनंजय है। जो सच में धनवान है। बल्कि मंदिर में लोग इसे जटाधारी कहते है। इसकी दो बहनें है जिनका यह इकलौता भाई है। इसके पिता राधेश्याम सिंह कोलकाता की एक बड़ी कंपनी में एचआर की पोस्ट पर काम करते हैं।

दरअसल एक दिन धनंजय के पैर से खून बहने लगा तो गीता गोपाल संस्था के सदस्य ने उन्हें पट्टी कराने के लिए बुलाया। जब उनसे पूछा गया कि वे कहां के रहने वाले हैं तो उन्हें याद नहीं आ रहा था। मगर मुश्किल से उन्हें एक नंबर याद आया और उस नंबर पर जब फोन किया गया तब पता चला कि वो आजमगढ़ का नंबर है। फ़ोन करने पर पता चला दो साल पहले वो घर से गायब हो गया था और जब उसकी बहन हरियाणा से भाई को लेने पहुंची तो उसका हाल देखकर रोने लगी। बहन के मुंह से सिर्फ इतना निकला- धर्मेंद्र तुम्हे फोन नंबर याद था तो दो साल पहले ये फोन नहीं करवा सकते थे।

नेहा ने बताया कि ‘इकलौता भाई होने की वजह से धनंजय परिवार का लाडला है और बहुत ज्यादा जिद्दी है। उसने ग्रेजुएशन किया है लेकिन उसे नशे की लत लग गई थी। इसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी थी और उसने एक दिन घर छोड़ दिया था। परिवार ने उसे बहुत ढूंढने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मिला। अब तक घरवालों ने आस भी छोड़ दी थी। दो दिन पहले उन्होने बुआ से कहा था कि लगता है कि अब भाई दुनिया में नहीं है। बहन ने भाई के लिए गुरुवार के व्रत भी रखे और संयोग से इसी दिन भाई के जिंदा होने की खबर मिली।’

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