अजब गजब

ऑटोवाले को सलाम, लड़की की बचायी जान, 6 साल बाद दोनों मिले तो नहीं थमे आंसू

ज़रूरी नहीं की दिल का रिश्ता अपने घर वालों से ही हो. कभी-कभी हमे जीवन की राह में ऐसे लोग मिल जाते हैं जो अपनों से भी ज़ादा हमारे मिल जगह बन जाते हैं. असल बात भी यही है कि हमारा अपना सगा और सच्चा मित्र वही होता है जो हमारे कठिन समय में हमारे साथ रहता है और परिस्थिति चाहे कितनी भी ख़राब हो जाये कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता कई बार तो ऐसा होता है की हम जिन्हे अपना समझने की गलती कर बैठते हैं वही हमारे साथ विश्वासघात करते हैं. जीवन ऐसे ही अपने पराये लोगो की कहानी है.
आज हम आपको एक ऐसे ऑटोचालक के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने मुसीबत के वक़्त एक लड़की का साथ दिया सिवाए उसका फायदा उठाने के. इस ऑटो चालाक का नाम दिवाकर हंसमुख है. इस ऑटो चालक ने बिना किसी लालच के एक छोटी बच्ची के मदद की. एक रोज़ की बात है जब दिवाकर काम ख़तम करने के बाद शाम को घर जा रहे थे तो उन्हें अपने घर के पास किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी, जब उन्होंने देखा कि कौन रो रहा है तो उन्हें एक तकरीबन 16 साल की बच्ची दिखाई दी. दिवाकर उस बच्ची को अपने घर ले आये और उसे खाना खिलाया और उसके बारे में पूछताछ की, की वो कहा से है.

थोड़ी देर बाद जब वह अपना होश संभल पायी तो उसने बताया की वह दिल्ली की रहने वाली है, लड़की ने आगे बताया की वह बीएससी की पढ़ाई कर रही है. उसके सगे मामा ने ही उसे पिक्चरों में काम दिलवाने के बहाने मुंबई लाकर बेच दिया, लड़की जैसे तैसे अपनी जान छुड़ा कर भागने में कामयाब गयी. दिवाकर की आँखों में आंसू आ गए इतना सब सुन कर. फिर दिवाकर तीन दिन बाद ही उस लड़की को उसके घर वापस छोड़ आये.
तकरीबन 6 साल बाद दिवाकर का सड़क दुर्घटना में पैर टूट गया और ऐसे में उसका रोटी के लिए पैसा जुटा पाना भी मुश्किल हो गया, फिर बाद में वह दिल्ली आकर रिक्शा चलाने लग गया. दिवाकर जब एक बार होटल में खाना खा रहे थे तब उन्होंने देखा की एक मैडम उन्हें देख रही हैं, थोड़ा दिमाग पर ज़ोर डालने पर दोनों ने एक दुसरे को पहचान लिया और दोनों की आँखों में आंसू आ गये.
आप को बात दे की यही लड़की हर साल दिवाकर के घर जा कर उन्हें राखी बांधती है वो उन्हें अपने भाई की तरह देखती है जिस ने उन्हें बचाया था.
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