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नागरिकता कानून संशोधन में हुए विरोध में बंद हुए इंटरनेट पर हर घंटे लगता करोड़ो का चूना, जाने कितना

उत्तरप्रदेश के कई जिलों में नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बाद प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए जहां लोगों पर लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े वहीं कई दिनों तक एहतियात के तौर पर इंटरनेट की भी बन्दी कर दी गयी। वैसे तो इंटरनेट उपभोक्ताओं को लगता है कि उनकी एमबी और उनके पैसों का नुकसान हुआ है लेकिन हम आपको बताते है कि इंटरनेट बंदी से प्रति घंटा  कितने करोड़ का झटका टेलीकॉम कंपनियों को लगा है।

हालांकि देश के कई शहरों में अभी भी इंटरनेट की बंदी चल रही है। एक तरफ जहां इस बंदी से अफवाहों पर  ब्रेक लगा है। वहीं, टेलिकॉम कंपनियों को रोजाना करोड़ों का झटका लगा है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) का कहना है देश में इंटरनेट बंदी से हर घंटे करीब 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

स्मार्ट होते दौर में आजकल लोग शॉपिंग से लेकर घर के जरूरी कामों को ऑनलाइन करना पसंद करते है। बिजली का बिल हो या सफर और मूवी टिकट की बुकिंग इंटरनेट बंद होने का सब पर बुरा असर पड़ा है। लेकिन सबसे बड़ा असर सफर यानी यातायात पर पड़ा। हवाई यात्रा, रेल टिकट हो या ओला-ऊबर जैसी कैब सुविधा बिना इंटरनेट के इस सुविधाओं का इस्तेमाल लोग नहीं कर सके।

इस बंदी ने जहां लोगों को बोर किया वही लोगों की सेहत तक खराब कर दी। दरअसल, ज्यादातर लोग ऑनलाइन पेमेंट या फिर कार्ड से अस्पतालों में शुल्क का भुगतान करते हैं। इंटरनेट बंद होने से तुरंत इलाज में परेशानी उठानी पड़ी। सुविधा इंटरनेट सुविधा बंद होने बैंकों का काम प्रभावित होता है। यहीं नहीं, लोगों को बिजली,पानी का बिल, बैंक की ईएमआई जमा करने में समस्या होती है। तय समय में बिलों को नहीं भरने पर जुर्माना भी लगता है।

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