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नये साल में इस बार ऑर्बिटर के बगैर लांच होगा चन्द्रयान 3: के सिवन

भले ही 2019 में चन्द्रयान-2 सफलता के झण्डे न गाड पाया हो लेकिन अब भी नासा के वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी इस साल  एक बार फिर से चन्द्रयान 3 चांद की सतह को  छुकर उसके राज का पर्दा फाश करने की कोशिश करेगा। लेकिन इसरो के प्रमुख के सिवन के अनुसार इस बार चन्द्रयान 3 विक्रम के बगैर चांद की सतह पर उतरेगा।

के सिवन (K Sivan)  ने बुधवार को अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिल गई है। उन्‍होंने बताया, ‘इस प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए चार लोगों को चुन लिया गया है। इन चारों को ट्रेनिंग के लिए रूस भेजने की योजना है।’ उन्‍होंने बताया, ‘हमने चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) पर अच्‍छी तरक्‍की की हालांकि हम लैंडिंग में सफल नहीं हो सके, अभी भी ऑर्बिटर काम कर रहा है। यह अगले सात सालों तक काम करेगा और हमें डाटा उपलब्‍ध कराएगा।’

बेंगलुरु स्थि‍त इसरो मुख्‍यालय में चेयरमैन के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 में लैंडर और रोवर तो होंगे लेकिन ऑर्बिटर नहीं होगा। आपको बता  दे गुजरे हुए साल 2019 के सितम्बर माह में चंद्रयान-2 मिशन के जरिए ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक स्‍थापित किया गया था। यह वैज्ञानिक आंकड़ा पृथ्‍वी पर भेज रहा है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘काफी संभावना है कि 2020 में लैंडर और रोवर मिशन पूरा होगा। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है चंद्रयान-2 मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिला है। दुनिया का कोई देश अपने पहले प्रयास में चंद्रमा की सतह पर नहीं पहुंचा। अमेरिका ने भी कई प्रयास किए।’
चद्रयान3 का लक्ष्य चंद्रमा का दक्षि‍णी ध्रुव है जहां पहले कोई चंद्रयान नहीं गया। ऐसा माना जाता है कि यहां क्रेटर्स के तौर पर पानी है। इसरो ने उम्‍मीद जताई थी कि बर्फ के तौर पर वहां मौजूद पानी की पुष्टि करेंगे जो इसने वर्ष 2008 में अपने मिशन में पहली बार खोजा था। केवल अमेरिका, रूस और चीन अब तक चंद्रमा की सतह पर पहुंचे हैं। पिछले साल बीजिंग ने एक मिशन किया था जो असफल रहा वहीं इजरायल का भी स्‍पेसक्राफ्ट सफल लैंडिंग नहीं कर सका।
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